रविवार, 6 जून 2010

चाचा को समर्पित एक और रचना

भतीजों के दिलों में है बड़ा सम्मान चाचा का
नहीं ले पाएगा कोई कभी स्थान चाचा का

न अब तक भूल पाए हम वो इक एहसान चाचा का
बहुत पहले कभी खाया था हम ने पान चाचा का

इन्हें महदूद मत करिए, चचा तो विश्वव्यापी हैं 
न हिंदुस्तान चाचा का, न पाकिस्तान चाचा का 

कोई दो चार सौ दे दे तो दीगर बात है वरना 
नहीं बिकता है दस या बीस में ईमान चाचा का 

यही दो-तीन फोटो और यही छह-सात लव लेटर 
पुलिस वालों को बस इतना मिला सामान चाचा का 

वो अपनी जेब में अरमानों की इक लिस्ट रखते हैं 
नहीं निकला है अब तक एक भी अरमान चाचा का 

चचा ग़ालिब भी माथा ठोंक लेंगे अपना जन्नत में 
अगर पढ़ने को मिल जाए उन्हें दीवान चाचा का  

10 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

वाह-वाह!
वाह-वाह!
वाह-वाह!
वाह-वाह!

राज भाटिय़ा ने कहा…

चाचा चाचा आखिर कोन है यह चाचा.....

'उदय' ने कहा…

...बहुत सुन्दर!!!

Gaurav Singh ने कहा…

बोहोत ही सुन्दर रचना है, शब्द दिल तक पोहोचते हैं।
धन्यवाद प्रकट करना चाहूँगा आपका, कृपया क़ुबूल करें।
"धन्यवाद"।

Gaurav Singh ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
वीनस केशरी ने कहा…

चाचा-भतीजे के रिश्ते के ऊपर लिखना कानूनन जुर्म है आपके ऊपर तीन भतीजों को नैनीताल दर्शन का जुर्माना किया जाता है

सम्मन आप तक पहुचाया जा रहा है ज्यादा देर करने पर जुर्माना मे धन राशि को भी जोड़ा जा सकता है

चचा ग़ालिब भी माथा ठोंक लेंगे अपना जन्नत में
अगर पढ़ने को मिल जाए उन्हें दीवान चाचा का

ये शेर विस्तृत व्याख्या मागता है
चाचा का दीवान पढ़ने के बाद चचा ग़ालिब क्यों अपना माथा पीटेंगे ?
कहीं ऐसा तो नहीं उन्हें अपना लिखा कुछ और शेर दीवान-ए-ग़ालिब से खारिज करना पड़ जाए, जैसा कि उन्होंने ३५०० मे से २००० शेर पहले ही खारिज कर दिये थे

दिगम्बर नासवा ने कहा…

चाचा से मिलने की तमन्ना जाग गयी है अब तो ....
भई इतनी लाजवाब लच्छेदार ग़ज़ल पढ़ कर तो इंतज़ार नही हो रहा ...

रचना दीक्षित ने कहा…

बड़े दिनों से आपका ब्लॉग खोज रही थी आखिर आज मिल ही गया पर आप तो यहाँ चाचा भतीजों का गुण गान करने में व्यस्त है अच्छा लगा चचा की तारीफ सुन कर

निर्मला कपिला ने कहा…

वाह वाह क्या बात है चाचा की ???? अद्भुत सुन्दर । शुभकामनायें

M VERMA ने कहा…

कोई दो चार सौ दे दे तो दीगर बात है वरना
नहीं बिकता है दस या बीस में ईमान चाचा का
चाचायमान इस रचना के क्या कहने
बहुत सुन्दर

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